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*जैन कर्म फिलोसॉफी*

 *कर्मशास्त्र पढने का हेतु :*

 

        अनेक प्रकार की विषमता, विविधता, विचित्रता एवं विकृतियों से संसार भरा हुआ था, भरा हुआ है और अनंत काल तक भरा हुआ रहेगा ।

       विषमता आदि का कारण क्या ? इस प्रश्न के उत्तर का संशोधन करने हेतु जगतभर के कई दर्शनों ने खोजबीन की है। ज्यादातर धर्म- दर्शन इश्वर को कारण मानते हैं।

         जबकि जैन धर्म दर्शन के प्रणेता सर्वज्ञ-सर्वदर्शी वीतरागी ऐसे तीर्थंकर भगवंतो ने पुण्य पाप कर्म का खेल बताया है। शुभ प्रवृत्ति से शुभ कर्म और अशुभ प्रवृत्तिओं से अशुभ-पाप कर्म का बंध होता है। शुभ कर्मोदये सुख-संपत्ति आदि प्राप्त होता है। अशुभ कर्मोदये दुःख, दारिद्र्य, दुर्गति प्राप्त होती है। शुभाशुभ कर्म जीवजन्य है। जीवोपार्जित है। संसार को देखने की सत्यशोधक दृष्टि जैन धर्म ने प्रदान की है।

 

"आत्मा" एक चेतनवंत द्रव्य है। वह शुद्ध-बुद्ध- निर्मल द्रव्य है। आत्मा की दो प्रकार की अवस्था है। 1 कर्मसहित अशुद्धावस्था 2 कर्मरहित शुद्धावस्था |

 

अनादि अनंतकालीन इस संसार में सर्व जीव कर्मसहित अशुद्धावस्था वाले ही है। संसार में रहना और शुद्धावस्था से रहना यह संभव ही नहीं है, अर्थात् संसार में जीतने जीव है वे सभी कर्म के बंधन से बंधे हुए ही है। जैसा संसार अनादि अनन्त है वैसे ही जीव और कर्म का संबंध अनादि जरूर है परन्तु अंत रहित अनंत नहीं है। अत: कर्म और आत्मा का संबंध अनादि- सांत कक्षा का है) -

 

कर्म पुद्गल द्रव्य है। जड द्रव्य है, रूपी, रसी, गंधी एवं स्पर्शी होते हुए भी अत्यंत सूक्ष्म होने से चर्मचक्षु गोचर नहीं हो सकता है। फिर भी जीव को सुखी-दुःखी रोगी- निरोगी, धनवान-गरीब मनुष्य, देव, तिर्यंच गति के पशु-पक्षी बनाने में कैसे कारणीभूत होता है, यह जानना है, समजना है एवं सीखना है।

Vipaak Sutra / Karma Shastra

Vipaak Sutra / Karma Shastra

Vipaak Sutra / Karma Shastra
15 Sept 2021 Vipaak Sutra / Karma Shaastra Part 1

15 Sept 2021 Vipaak Sutra / Karma Shaastra Part 1

01:09:03
15 Sept 2021 - Vipaak Sutra / Karma Shaastra Part 2

15 Sept 2021 - Vipaak Sutra / Karma Shaastra Part 2

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18 Sept 2021 - Vipaak Sutra / Karma Shaastra Part 3

18 Sept 2021 - Vipaak Sutra / Karma Shaastra Part 3

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Study of Jain Karma Philosophy (2021).

*Karma Philosophy* class refer
કર્મ તણી ગતિ ન્યારી (ભાગ -૧,૨)
कर्म की गति न्यारी (भाग-१,२)
In Gujarati & Hindi.

Study of Jain Karma Philosophy (2021)

Study of Jain Karma Philosophy (2021)

Study of Jain Karma Philosophy (2021)
Class-1 I Study of Jain Karma Philosophy I Karmas & Samsara I Date : July 12, 2021

Class-1 I Study of Jain Karma Philosophy I Karmas & Samsara I Date : July 12, 2021

58:30
Class-2 I Study of Jain Karma Philosophy I Karmas & Samsara I Date : July 14, 2021

Class-2 I Study of Jain Karma Philosophy I Karmas & Samsara I Date : July 14, 2021

01:00:05
Class-3 I Study of Jain Karma Philosophy I संसार चक्र कारण - ईश्वर vs कर्म I Date : July 19, 2021

Class-3 I Study of Jain Karma Philosophy I संसार चक्र कारण - ईश्वर vs कर्म I Date : July 19, 2021

01:02:42

KARMA

JAINISM With Dr. Arunvijayji

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© अरुणविजयजी પ્રભુ આજ્ઞા વિરુદ્ધ કઈ પણ લખાયું હોય, તો મન વચન કયા થી મિચ્છામી દુક્કડમ 

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