top of page
Screenshot_2021-09-04-05-53-50_edited_edited.png

18 Papasthan

પાપનો માર્ગ એ દુ:ખદાયી માર્ગ છે..શરૂઆતમાં ખૂબ જ મીઠો લાગે..પણ પરિણામ કેવું ભયંકર..પાપનો કાળ તો ક્ષણિક માત્રનો જ પણ સજા તો કેટકેટલા ભવ સુધીની.
કર્મસત્તાએ તો તીર્થંકર ભગવંતને પણ નથી છોડ્યા તો વિચારો આપણું શું થશે.

१८ पापस्थान 

1.प्रणातिपात- किसी भी जीव की हिंसा करना ,उसका वध कर देना, उसे जान से मार देना यह सबसे बड़ा पाप है ।

 

2. मृषावाद- असत्य वचन बोलना ,हमेशा झूठ बोलना यह सबसे बड़ा पाप है ।

 

3. अदत्तादान- किसी से पूछे बिना उसकी वस्तु लेना, चोरी करना यह पाप है ।

 

4. मैथुन - असंयमित होकर कुशील का सेवन करना पाप है।

 

5. परिग्रह - किसी वस्तु को संचित करना, द्रव्य आदि रखना ममता रखना पाप है।

 

आप कहेंगे क्यों ?

 

क्योंकि जो वस्तु हमारी आत्मा में कलेश उत्पन्न करें और उसके मूल स्वरूप में परिवर्तन लाए जिससे आत्मा अपनी पहचान खो जाती है ,वह पाप है।

 

6.क्रोध - खुद तपना ,दूसरों को तड़पाना, अत्यधिक क्रोध करना पाप है क्रोध सभी प्रकार की हानियों की जड़ है और यह पाप का मूल है।

 

7. मान- अंहकार (घमंड करना) पाप है ।

 

8. माया- ठगाई करना, कपट पूर्वक आचरण करना ।

 

9. लोभ - तृष्णा बढ़ना,अत्यधिक पाने की लालसा करना ।

10.राग- मनोज्ञ वस्तु पर स्नेह रखना, प्रीति करना । 

 

11.द्वेष- अमनोज्ञ वस्तु पर द्वेष करना ।

 

12. कलह - क्लेश करना ।

 

13. अभ्याख्यान - किसी पर झूठा कलंक लगाना ।

 

14. पैशुन्य- दूसरों की चुगली करना ।

 

15. परपरिवाद- दूसरों का अवर्णवाद (निन्दा) बोलना ।

 

16.रति अरति- पांच इंद्रियों के 23 विषयों में से मनोज्ञ वस्तु पर प्रसन्न होना, अमनोज्ञ वस्तु पर नाराज होना ।

 

17.मायामृषावाद- कपट सहित झूठ बोलना ।

 

18.मिथ्यादर्शन - असाधु को साधु समझना, कुदेव, कुगुरु कुधर्म पर श्रद्धा रखना ।

 

इस प्रकार उपरोक्त वर्णित 18 पापों को छोड़ देने से ही जीव की मुक्ति संभव होती है । इसलिए प्रत्येक जैन मुनि और जैन श्रावक छोटे से छोटे जीव की हिंसा के बारे में भी विचार करता है। 

18 Paap Sthanak_Interactive Zoom Class (Saturday/Sunday)

JAINISM With Dr. Arunvijayji

  • Instagram
  • Presentation Videos
  • Telegram
  • Whatsapp
  • dr.arunvijay
  • Facebook

© अरुणविजयजी પ્રભુ આજ્ઞા વિરુદ્ધ કઈ પણ લખાયું હોય, તો મન વચન કયા થી મિચ્છામી દુક્કડમ 

bottom of page